मजदूर जगेश्वर के पास खुद कि जमीन नही, किराये की जमीन लेकर शुरू की खेती, आज कमा रहा लाखो रूपये
इंसान अगर दृढ़ इच्छा शक्ति के लगन के मेहनत करे तो कुछ भी संभव है। परिस्थितियां कितनी ही विपरीत क्यों न पर अपने जीवन को संवारा सकता है। जिसका उदाहरण हम सारंगढ़ जिला मुख्यालय से 8 किमी दुर ग्राम माधोपाली में देख सकते है। मजदुर जगेश्वर के पास न तो खुद की जमीन है।पर एक समय ऐसा भी आया हालात परिस्थिति ऐसी आई कि कर्ज से भी लद गये। मजदुरी कर कर्ज उतार पाना भी संभव नही था। तब जगेश्वर ने ठानी गरीब मजदुर हूं पर भी लिए कर्ज जरूर चुकांऊगा। गांव के किसानों से उनकी अनुपियोगी जमीन को किराये में लेकर खेती शुरू की आज कर्ज भी उतार दिया। अब एक स्वाभिमानी एवं खुशहाल जिंदगी गुजार जा रहे हैं। ये किराये पर ली गई जमीन से 8 माह की सब्जी खेती करके लाखों की आमदनी ले रहे हैं।टुकड़े-टुकड़े जमीन के लगभग 1 एकड़ के खेत में जगेश्वर बरीहा मिश्रित सब्जी की खेती कर रहे। हैं। खेत के अलग-अलग टुकड़ों में अलग-अलग प्रकार की खेती किए हुए हैं जिनमें भिंडी,बरबट्टी, छोटी चौलाई,मूंगफली,मक्का,बड़ी चौलाई आदि सब्जी शामिल हैं। पहले ये घर की स्थिति खराब होने के कारण मजदूरी करते थे। इस दौरान ये किसानों के खेत में काम करने लगे खेती करने के सारे गुण भी सीखे लिए। जगेश्वर बताते है पिछले 3 वर्ष किसानों से ही खेत किराए में लेकर सब्जी खेती शुरू की है सब्जी खेती में 6 से 8 माह की खेती में लगभग 1 से 1.5 लाख कमा लेता हूं। खेतों में झोपड़ी बनाकर रहते है दिन के सब्जी बेचने चला जाता हूं रात को यहां रहता हूं दिन में घर के लोग रहकर रखवाली करते हैं। खेती के दौरान रात दिन यहीं खेत में रुकते हैं। बरसात के दिनों में किसान धान की खेती करते है तो जमीन वापस ले लेते है उस दौरान फिर से हम परिजन मजदूरी कर लेते हैं।
जलसंकट के समय में नाला पर गढ्ढा करवाकर फसल को बचाया
किसान जगेश्वर बरीहा ने भास्कर से चर्चा पर बताया कि फरवरी के माह से जब जल संकट शुरू हुआ तो फसलों के ठीक फूलने-फलने का समय आया था और पास के नाले का पानी भी सुख चुके थे छोटे गढ्ढे में पानी बचा हुआ था।जिसमें जनरेटर के माध्यम से पानी खींचने से गढ्ढा सूखने लगा था।तभी पास के साथी किसानों के साथ मिलकर स्वयं के पैसे से नाले में गढ्ढा करवाकर रिसाव हो रहे पानी से खेतों में पानी की पूर्ति किए।फसलों के बचने की उम्मीद तो त्याग दिए थे लेकिन नाले के गढ्ढे में रिसाव बढ़ने से उम्मीद जगी और खेतों में बारी-बारी से जल पूर्ति किए जिससे सब्जी की फसल लहलहाने लगे।
सब्जी खेती से कर्जदारों से मिला छुटकारा
जगेश्वर कहते है करीब 4 वर्ष पहले प्रधानमंत्री आवास मिला घर को अच्छा बनाने के चक्कर में लगभग 70 हजार का कर्ज हो चुका था जो कि मजदूरी के पैसों से चुका पाना मुमकिन नहीं था। जब ब्याज बढ़ने लगा तो एक चिंता सताने लगी और हिम्मत जुटाकर किसानों की जमीन किराये में लेकर कई महीने घर को त्यागकर खेती में जुट जाने से आवक बढ़ने लगी।पहले 2 वर्षों में ही कर्ज से मुक्त हो गया। घरों में जरूरतों के समान उपलब्ध भी करा लिए हैं।अभी भी खेतों में सब्जी फसल लगे हुए हैं बाजारों में दाम अच्छे हैं जिससे आमदनी अच्छी हो रही है।
जमीन किराया का है पर नही देना पड़ता किराया
जगेश्वर चर्चा पर बताते है किसानों से जमीन लेते समय कुछ रकम देने की बात तय हुई थी। पर खाली समय में किसानों के आवश्यक कार्य कर देने से किसान खुश है। इन दिनों उनके आम के पेड़ों की रखवाली भी कर देता हूं एवं साग- सब्जी भी उनके घर पहुंचा देता हुं अब वे किराया के लिए भी कभी नही बोलते है।
.jpeg)