जयपुर में गूंजी वैष्णव एकता की हुंकार, महासम्मेलन की तैयारियों को मिली नई दिशा...
गुड न्यूज छत्तीसगढ़।
जयपुर। चार संप्रदाय वैष्णव समाज के प्रस्तावित विशाल महासम्मेलन को लेकर राजस्थान की राजधानी जयपुर में 23 मई 2026 को एक महत्वपूर्ण एवं निर्णायक बैठक संपन्न हुई। चित्रकूट एवं दिल्ली में आयोजित पूर्व बैठकों की श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए आयोजित इस बैठक में देशभर की विभिन्न राष्ट्रीय वैष्णव संस्थाओं के पदाधिकारियों, समाजसेवियों एवं प्रतिनिधियों ने भाग लेकर महासम्मेलन की व्यापक रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक का शुभारंभ ईश वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर जगतगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के शिष्य एवं उत्तराधिकारी, प्रस्तावित महासम्मेलन के संयोजक तथा मार्गदर्शक विद्वान युवराज आचार्य रामचंद्रदास जी महाराज वर्चुअल माध्यम से उपस्थित हुए और समाजजनों को अपना आशीर्वाद प्रदान किया।
आचार्य रामचंद्रदास जी महाराज ने महासम्मेलन के आयोजन हेतु अयोध्या अथवा जयपुर को उपयुक्त स्थान बताते हुए कहा कि यह आयोजन वैष्णव समाज की एकता और संगठन का ऐतिहासिक केंद्र बनेगा। उन्होंने बताया कि महासम्मेलन में एक से डेढ़ लाख लोगों की सहभागिता संभावित है। इसके साथ ही उन्होंने आयोजन की व्यवस्थाओं, उद्देश्य, कार्यप्रणाली एवं संचालन व्यवस्था को लेकर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।
बैठक के दौरान आचार्य रामचंद्रदास जी महाराज ने जगतगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज की ओर से महासम्मेलन के सफल आयोजन के लिए 5 लाख रुपये के सहयोग की घोषणा की। इस घोषणा का उपस्थित समाजजनों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया। सर्वसम्मति से यह भी निर्णय लिया गया कि महासम्मेलन का संचालन एवं मार्गदर्शन परम पूज्य जगतगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के सानिध्य, नेतृत्व एवं अध्यक्षता में किया जाएगा।
कमांडिंग कमेटी का गठन
महासम्मेलन को दिशा एवं मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमांडिंग कमेटी का गठन किया गया। इसमें जयन्तिलाल वैष्णव (मुंबई), विष्णुदत्त शर्मा (कोटा), श्यामसुन्दर (हरिद्वार), महावीर प्रसाद (दिल्ली) तथा आर.के. वैष्णव (मुंबई) को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
प्रमुख कार्य समिति का हुआ विस्तार
महासम्मेलन के सफल संचालन, समन्वय एवं व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए देश के विभिन्न राज्यों और शहरों से समाज के वरिष्ठ एवं सक्रिय प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक विस्तृत प्रमुख कार्य समिति का गठन किया गया। समिति में मुंबई, जयपुर, उज्जैन, सूरत, जोधपुर, दिल्ली, नोएडा, वडोदरा, छत्तीसगढ़, कोयम्बटूर, ठाणे, भिलाई, मथुरा सहित देश के अनेक क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया।
नाम
आनंन्दीलाल जयपुर
3) मनोहरदादा ऊज्जैन
4) सुनिल सुरत
5) राजेश मूर्तिकार
6) एन. डी. निम्बावत जोधपुर
7) डी. सी. वी. किरण रूपनगढ
8) अनिल रामावत मुंबई
9) यू. के. स्वामी वडोदरा
10) विनोद टिलावत नोयडा
11) लखनदास जी छतीसगढ,
12) भानुशंकर जी मुंबई
13) आनन्दराज सुरत
14) बुलाराम कोयम्बतूर
15)ऊत्तम चितौङगढ
16) कपूरदास ठाणे महाराष्ट्र
17)निरंकार दिल्ली
18) जे पी रामावत दिल्ली
19) सुरेश व्यास जोधपुर
20) मूलचंद स्वामी जयपुर
21) विष्णु अजमेर
22) कैलाश जी मुंबई
23) दिनेश जी मुंबई.
24)महेश जयपुर
25) योगेश एन वैष्णव जयपुर
27) राकेश स्वामी दिल्ली.
28)शंभुदयाल जयपुर
29) सुनिल जोधपुर.
30) अशोक सोडाला.
32) दीपक जयपुर
33) घनश्याम जोधपुर
34)रामकिशन जयपुर
35)कृष्णावतार जयपुर
36)हनुमान जयपुर
37)प्रमोद वैद्य हिंनडोन सिटी
38) विनोद वैष्णव जयपुर.
39)पूरणदास भिलाई
40)रामजी लाल जयपुर
41)ओमप्रकाश हाथोज
42)जितेन्द्र स्वामी सरदारशहर
43)दिलखुश जयपुर
44)जगन्नाथ बैरागी रायपुर
45)मुरलीधर स्वामी दिल्ली
46)सुभाषचंद्र शर्मा(वैष्णव)
47)दिनेशचंद्र शर्मा दिल्ली
48)मनोज कु. शर्मा मथुरा
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि समाज के अन्य प्रतिष्ठित एवं सक्रिय बंधुओं की सहमति प्राप्त होने पर उन्हें भी समिति में सम्मिलित किया जाएगा, जिससे महासम्मेलन को और अधिक व्यापक एवं प्रतिनिधित्वपूर्ण स्वरूप मिल सके।
समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी गई
बैठक में समाज एवं महाराज श्री के बीच समन्वय स्थापित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी महेंद्र वैष्णव (टुमकुर) को कार्यदर्शी के रूप में सौंपी गई। वहीं प्रदीप रामावत (दिल्ली) एवं परमानंद स्वामी (दिल्ली) को सहकार्यदर्शी नियुक्त कर महासम्मेलन की तैयारियों को गति देने का निर्णय लिया गया।
वैष्णव समाज की एकता का बनेगा ऐतिहासिक मंच
बैठक में उपस्थित वरिष्ठजनों ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रस्तावित महासम्मेलन देशभर के वैष्णव समाज की एकता, संगठन, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक उत्थान का नया अध्याय लिखेगा। जगतगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज के मार्गदर्शन में आयोजित होने वाला यह महासम्मेलन वैष्णव समाज के इतिहास का अब तक का सबसे विशाल, प्रभावशाली एवं ऐतिहासिक आयोजन बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
समाजजनों का मानना है कि यह महासम्मेलन केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि वैष्णव समाज की सामूहिक शक्ति, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक जागरूकता का विराट प्रदर्शन होगा, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
